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15 अप्रैल । अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने चेतावनी दी है कि अमरीका और इस्राएल के बीच ईरान को लेकर चल रहा युद्ध ऊर्जा संकट पैदा कर सकता है और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में भीषण मंदी आ सकती है।
आईएमएफ ने अपने नवीनतम वैश्विक आर्थिक आउटलुक में कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने या ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचने से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।
रिपोर्ट में विभिन्न परिणामों की आशंकाएं व्यक्त की गई हैं। बहुत अच्छी स्थिति में यदि युद्ध जल्दी समाप्त भी जाए और वर्ष के मध्य तक ऊर्जा बाजार स्थिर हो जाए तो भी 2026 में वैश्विक विकास दर थोड़ी धीमी होकर लगभग 3.1% रह जाएगी। मुद्रास्फीति उच्च बनी रहेगी।
खराब स्थितियों में, प्रभाव कहीं अधिक गंभीर हो जाता है। यदि तेल की कीमतें लगभग 100 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं, तो वैश्विक विकास दर गिरकर 2.5% हो सकती है।
अत्यंत गंभीर स्थिति में, यदि तेल की कीमतें इस वर्ष बढ़कर 110 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल और अगले वर्ष 125 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो जाती हैं, तो वैश्विक विकास दर गिरकर 2% हो सकती है, जो वैश्विक मंदी के करीब होगी, जबकि मुद्रास्फीति बढ़कर लगभग 6% हो जाएगी। आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गौरिंचास ने कहा कि विश्व अर्थव्यवस्था को एक और बड़ा झटका लगने वाला है, खासकर अगर संघर्ष जारी रहता है।
आईएमएफ ने सरकारों को बड़े पैमाने पर, अनियोजित खर्च करने के खिलाफ चेतावनी भी दी और कहा कि सहायता अस्थायी और लक्षित होनी चाहिए क्योंकि मुद्रास्फीति अभी भी अधिक है और सार्वजनिक ऋण पहले से ही काफी ऊंचा है।