वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने आज प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को वित्तीय अपराधों से राष्ट्र की रक्षा करने वाली ढाल बताया। मंत्री नई दिल्ली में 70वें ईडी दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईडी को दी गई शक्तियां मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला लेनदेन, बेनामी संपत्तियों और कॉर्पोरेट धोखाधड़ी जैसे वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए हैं, न कि व्यक्तियों को निशाना बनाने के लिए।
कड़े प्रवर्तन की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे अपराध अर्थव्यवस्था और आम नागरिक के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। मंत्री ने यह भी बताया कि इस वर्ष 31 मार्च तक, ईडी ने लगभग 23 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है, जिसमें से 63 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि बैंकों, निवेशकों और घर खरीदारों सहित उनके वास्तविक स्वामियों को वापस कर दी गई है।
उभरती चुनौतियों का जिक्र करते हुए श्री चौधरी ने कहा कि साइबर धोखाधड़ी और ऑनलाइन वित्तीय अपराध बढ़ती चिंता का विषय हैं और इनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए केंद्रीय एजेंसियों के बीच मजबूत सहयोग का आह्वान किया। मंत्री ने दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाती है। इस अवसर पर मंत्री ने जयपुर क्षेत्रीय कार्यालय का भी उद्घाटन किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, ईडी के निदेशक राहुल नवीन ने कहा कि वित्तीय अपराधों का स्वरूप बैंक धोखाधड़ी और कॉरपोरेट घोटालों से हटकर क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी, साइबर-आधारित अपराध, आतंकवाद वित्तपोषण और मादक पदार्थों की तस्करी की ओर मुड़ गया है। उन्होंने कहा कि निदेशालय ने इन उभरते खतरों से निपटने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठाए हैं और आपराधिक नेटवर्कों को उनके वित्तीय स्रोतों को निशाना बनाकर बाधित करने की रणनीति अपनाई है।
वैश्विक सहयोग पर प्रकाश डालते हुए, श्री नवीन ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी प्रयासों में भारत की भूमिका मजबूत हुई है, जिसमें ईडी अंतरराष्ट्रीय ढांचों और संपत्ति वसूली नेटवर्क में योगदान दे रही है। इस अवसर पर राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सूर्यप्रकाश वी. राजू और ईडी के विशेष निदेशक मनु टेंटिवाल भी उपस्थित थे।