नई दिल्ली, 12 मई (हि.स.)। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने पानीपत–जालंधर हाईवे परियोजना से जुड़े दो बड़े मध्यस्थता मामलों में 819.96 करोड़ सरकारी रुपये की बचत की। इन विवादों में रियायतधारकों द्वारा 8,375 करोड़ रुपये से अधिक के दावे और एनएचएआई द्वारा 2,888.64 करोड़ रुपये के प्रतिदावे शामिल थे। विस्तृत सुनवाई और साक्ष्यों की जांच के बाद मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने एनएचएआई के पक्ष में फैसला सुनाया।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि पहले मामले में 5,443 करोड़ रुपये से अधिक के दावे किए गए थे, जिनमें टोल संग्रह में कथित नुकसान, अवसर हानि, टर्मिनेशन भुगतान और स्कोप परिवर्तन से जुड़े विवाद शामिल थे। एनएचएआई ने इन दावों का कड़ा विरोध किया और न्यायाधिकरण ने अधिकांश दावे खारिज कर दिए। प्रतिदावों को स्वीकार करते हुए न्यायाधिकरण ने एनएचएआई के पक्ष में लगभग 115.73 करोड़ रुपये का नेट अवॉर्ड दिया।
दूसरे मामले में 2,931.79 करोड़ रुपये से अधिक के दावे किए गए थे, जिनमें परियोजना में देरी, लागत वृद्धि और अन्य वित्तीय प्रभाव शामिल थे। एनएचएआई ने इन्हें अनुबंधीय प्रावधानों और साक्ष्यों के आधार पर चुनौती दी। न्यायाधिकरण ने अधिकांश दावे खारिज कर दिए और एनएचएआई के प्रतिदावों को स्वीकार करते हुए लगभग 704.23 करोड़ रुपये का नेट अवॉर्ड दिया।
इससे पहले एनएचएआई ने गुजरात के कमरेज–चलथन खंड (एनएच‑48) से जुड़े मध्यस्थता मामले में भी सफलता पाई थी, जिसमें 174.49 करोड़ रुपये के दावों के विरुद्ध केवल 54 लाख रुपये का अवॉर्ड दिया गया था।