Diesel-पेट्रोल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट सेक्टर में बढ़ा दबाव

Posted on: 2026-05-26


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हिमाचल प्रदेश : पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर अब सीधे ट्रांसपोर्ट और औद्योगिक सेक्टर पर दिखाई देने लगा है। ईंधन कीमतों में वृद्धि के बाद ट्रक ऑपरेटरों ने मालभाड़ा बढ़ाने का फैसला किया है, जबकि बस ऑपरेटरों ने किराये को लेकर 30 मई के बाद निर्णय लेने की बात कही है।

ट्रक ऑपरेटरों की ओर से पहले उद्योग विभाग को लिखित प्रस्ताव भेजकर मालभाड़े में करीब चार प्रतिशत वृद्धि की मांग की गई थी। अब ताज़ा स्थिति में ऑपरेटरों ने मालभाड़े में लगभग तीन प्रतिशत की वृद्धि करने की बात कही है। उनका कहना है कि लगातार बढ़ते डीजल के दामों के कारण संचालन लागत में भारी इजाफा हुआ है, जिसे संतुलित करना जरूरी हो गया है। ट्रांसपोर्ट यूनियन के प्रतिनिधियों के अनुसार, ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे उनके खर्चों को प्रभावित करती है, क्योंकि ट्रक संचालन में सबसे बड़ा हिस्सा डीजल का ही होता है। इसी वजह से माल ढुलाई दरों में संशोधन अनिवार्य हो गया है। मालभाड़े में बढ़ोतरी का असर उद्योग जगत पर भी पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ती है, तो इसका सीधा असर उत्पादों की कीमतों पर पड़ता है। कई उद्यमी इस बढ़े हुए खर्च को उपभोक्ताओं पर डालने के लिए मजबूर हो सकते हैं, जिससे बाजार में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। औद्योगिक क्षेत्रों में मालभाड़ा तय करने का एक सामान्य फार्मूला भी बताया गया है। इसके अनुसार, यदि डीजल की कीमत में एक रुपये प्रति लीटर की वृद्धि होती है, तो ट्रक संचालकों को प्रति किलोमीटर प्रति क्विंटल के हिसाब से लगभग 30 पैसे का अतिरिक्त भाड़ा दिया जाता है। यह प्रणाली लंबे समय से ट्रांसपोर्ट और उद्योगों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए अपनाई जाती रही है।

बस ऑपरेटरों ने भी संकेत दिए हैं कि वे ईंधन कीमतों के हालिया बदलाव को देखते हुए 30 मई के बाद अपने किराए को लेकर अंतिम निर्णय लेंगे। इससे आम यात्रियों पर भी किराया बढ़ने का असर पड़ सकता है। कुल मिलाकर, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि का असर केवल परिवहन क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उद्योग, व्यापार और उपभोक्ता बाजार तक पहुंचने की संभावना रखता है। आने वाले दिनों में यदि ईंधन कीमतों में स्थिरता नहीं आती है, तो महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।