इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी (INST) के शोधकर्ताओं ने एक अभिनव प्रकाश-चालित नैनो-उत्प्रेरक विकसित किया है, जो दवाओं और औद्योगिक रसायनों के निर्माण को अधिक स्वच्छ, तेज और ऊर्जा-कुशल बना सकता है। यह तकनीक विषैले विलायकों और उच्च तापमान वाली प्रक्रियाओं पर निर्भरता को कम करने की क्षमता रखती है।
शोध दल ने सोने और पैलेडियम के नैनोकणों को BODIPY नामक प्रकाश-अवशोषक अणु के साथ जोड़कर एक संकर नैनोमिश्रित पदार्थ तैयार किया है। यह पदार्थ प्रकाश-संचालित उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है और प्रकाश ऊर्जा का उपयोग करके रासायनिक अभिक्रियाओं को पारंपरिक प्रणालियों की तुलना में अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करता है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, यह नवाचार उद्योगों को ऊर्जा खपत, प्रदूषण और उत्पादन प्रक्रियाओं में हानिकारक रसायनों के उपयोग को कम करने में मदद कर सकता है।
'नैनोस्केल' पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, सोने के नैनोकण प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित कर उसे BODIPY अणु तक पहुंचाते हैं। इसके बाद BODIPY यह ऊर्जा पैलेडियम को हस्तांतरित करता है, जो रासायनिक अभिक्रिया को संचालित करने वाला सक्रिय उत्प्रेरक है। इन तीनों घटकों की सामूहिक क्रिया उत्प्रेरक की कार्यक्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाती है।
यह नैनो-उत्प्रेरक प्रतिक्रियाओं को हल्की और पर्यावरण-अनुकूल परिस्थितियों में संभव बनाता है। इसमें विषैले विलायकों के स्थान पर पानी तथा ऊर्जा-गहन ताप प्रणालियों के स्थान पर प्रकाश का उपयोग किया जाता है।
डॉ. प्रकाश पी. नीलकांतन के नेतृत्व में विकसित यह तकनीक दवाओं और औद्योगिक रसायनों के उत्पादन को अधिक किफायती और पर्यावरण-अनुकूल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह उपलब्धि भविष्य में टिकाऊ औद्योगिक प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने, ऊर्जा की खपत घटाने और हरित प्रौद्योगिकियों को अधिक सुलभ बनाने में सहायक सिद्ध होगी।