श्रीलंका
के केंद्रीय बैंक के गवर्नर डॉ. नंदलाल वीरसिंघे ने चेतावनी दी है कि यदि मध्य
पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ईंधन की कीमतें बढ़ती रहीं तो देश में
मुद्रास्फीति लगभग 7 प्रतिशत
तक बढ़ सकती है। एक स्थानीय समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि
ऊर्जा की बढ़ती लागत द्वीप राष्ट्र में नए सिरे से मुद्रास्फीति का दबाव पैदा कर
रही है, जो अभी भी 2022 के अपने सबसे बुरे आर्थिक संकट से उबर
रहा है। डॉ. वीरसिंघे ने बताया कि वर्तमान में मुद्रास्फीति लगभग 5.4 से 5.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, लेकिन कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहने और घरेलू उपभोक्ता मांग
मजबूत रहने पर यह और भी बढ़ सकती है।
गवर्नर
ने कहा कि पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी अस्थिरता ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों
को प्रभावित किया है, जिससे ईंधन की कीमतें बढ़ गई हैं और श्रीलंका जैसी आयात पर निर्भर
अर्थव्यवस्थाओं के लिए जोखिम पैदा हो गया है। उन्होंने आगे कहा कि मुद्रास्फीति को
नियंत्रित करने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक ने हाल ही में
एहतियाती कदम के रूप में मौद्रिक नीति को सख्त किया है। डॉ. वीरसिंघे ने कीमतों
में और अधिक वृद्धि को रोकने के लिए आने वाले महीनों में घरेलू मांग को नियंत्रित
करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।