2028 तक AI कोडिंग की लागत बढ़ सकती है, सैलरी से ज्यादा

Posted on: 2026-06-24


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 बुधवार को आई एक रिपोर्ट के अनुसार, 2028 तक AI कोडिंग की लागत एक औसत डेवलपर की सैलरी से ज़्यादा हो सकती है। ऐसा लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) टोकन की बढ़ती खपत और खपत-आधारित लाइसेंसिंग मॉडल की ओर बदलाव के कारण होगा। गार्टनर इंक. की रिपोर्ट में कहा गया है कि जो संगठन AI कोडिंग एजेंट के एक्सपेरिमेंट से बड़े पैमाने पर उन्हें लागू करने की ओर बढ़ रहे हैं, उन्हें लागत में भारी बढ़ोतरी का जोखिम उठाना पड़ सकता है। AI टोकन डेटा की वे इकाइयाँ हैं जिन्हें जेनरेटिव AI मॉडल प्रोसेस करते हैं। टोकन की खपत का सीधा असर AI कोडिंग टूल्स की लागत पर पड़ता है, खासकर खपत-आधारित प्राइसिंग स्ट्रक्चर के तहत। गार्टनर के सीनियर प्रिंसिपल एनालिस्ट नीतीश त्यागी ने कहा, "संगठन तेज़ी से AI कोडिंग एजेंट के एक्सपेरिमेंट से बड़े पैमाने पर उन्हें लागू करने की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन कई संगठन टोकन की बढ़ती खपत के वित्तीय असर को कम करके आंक रहे हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "सिर्फ़ डेवलपर्स की पसंद से टोकन के इस्तेमाल में अनुशासन नहीं आएगा, क्योंकि डेवलपर्स लागत-दक्षता के बजाय गति और सुविधा को प्राथमिकता देते हैं। अगर इंजीनियरिंग ऑपरेटिंग मॉडल को ठीक से नियंत्रित नहीं किया गया, तो लागत उन टूल्स से मिलने वाले प्रोडक्टिविटी फ़ायदों की तुलना में तेज़ी से बढ़ सकती है।" AI कोडिंग एजेंट वेंडर्स के बीच सीट-आधारित लाइसेंसिंग से खपत-आधारित प्राइसिंग की ओर बदलाव से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के काम के लिए लागत का ढांचा बहुत बदल रहा है। कई वेंडर्स टोकन की खपत की गणना और बिलिंग में पारदर्शिता नहीं रखते हैं, जिससे कंपनियों के लिए लागत का सही अनुमान लगाने और उसे नियंत्रित करने की क्षमता सीमित हो जाती है।

डेवलपमेंट के कामों में टोकन के इस्तेमाल की स्पष्ट जानकारी न होने पर संगठनों को बजट से ज़्यादा खर्च होने और लागत-बनाम-मूल्य के नतीजों को ट्रैक करने की क्षमता कम होने का जोखिम रहता है। त्यागी ने कहा कि ज़्यादातर संगठनों में अभी भी लागत और बिज़नेस पर पड़ने वाले असर को प्रभावी ढंग से मापने के लिए ज़रूरी समझ और फ्रेमवर्क की कमी है। उन्होंने आगे कहा, "सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग लीडर्स की चिंता बढ़ रही है क्योंकि टोकन-आधारित AI खर्च को सही ठहराना मुश्किल होता जा रहा है, और बजट अक्सर उम्मीद से पहले ही खत्म हो जाते हैं।"

रिपोर्ट में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया कि एजेंट-आधारित वर्कफ़्लो में बिना नियंत्रण वाली आज़ादी, बहुत बड़े कॉन्टेक्स्ट विंडो और इस्तेमाल को बेहतर बनाने के लिए व्यवस्थित फ़ीडबैक सिस्टम की कमी से ज़्यादा खर्च हो सकता है। रिपोर्ट ने लीडर्स से आग्रह किया कि वे इस्तेमाल के मामलों (use-cases) पर आधारित निर्णय लेने का फ्रेमवर्क बनाएं; मॉडल के चयन को काम की जटिलता के अनुसार तय करें; कॉन्टेक्स्ट इंजीनियरिंग के तरीकों को अनिवार्य करें और गवर्नेंस व लागत नियंत्रण लागू करें।