भारत और European Union (ईयू) के बीच 12वां भारत-यूरोपीय संघ मानवाधिकार संवाद बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत की ओर से पीयूष श्रीवास्तव, अतिरिक्त सचिव (यूरोप वेस्ट) और ईयू की ओर से भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेलफिन ने की।
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने खुले और सार्थक संवाद का स्वागत किया तथा इस तरह की नियमित बैठकों को महत्वपूर्ण बताया। दोनों पक्षों ने मानवाधिकारों को आगे बढ़ाने की दिशा में अपनी-अपनी उपलब्धियों, चुनौतियों और दृष्टिकोणों पर विस्तार से चर्चा की।
दोनों पक्षों ने जनवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन को याद किया, जहां नेताओं ने साझा मूल्यों लोकतंत्र, मानवाधिकार, बहुलवाद, कानून का शासन और संयुक्त राष्ट्र आधारित वैश्विक व्यवस्था के आधार पर भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई थी।
वैश्विक चुनौतियों के बढ़ते दौर में भारत और ईयू ने सभी मानवाधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि मानवाधिकार सार्वभौमिक, अविभाज्य और आपस में जुड़े हुए हैं।
संवाद के दौरान कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें नागरिक और राजनीतिक अधिकार, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अधिकार, भेदभाव समाप्त करना, प्रवासियों के अधिकार, धर्म और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, महिला अधिकार, एलजीबीटीक्यूआई+ समुदाय के अधिकार और बाल अधिकार शामिल रहे।
भारत और ईयू ने विश्वसनीय, टिकाऊ और मानव-केंद्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) विकसित करने पर भी सहमति दोहराई। यह प्रतिबद्धता भारत में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान भी सामने आई थी।
दोनों पक्षों ने मानवीय सहायता और आपदा राहत सहयोग बढ़ाने में साझा रुचि दिखाई। इसके अलावा व्यापार और मानवाधिकारों से जुड़े संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों के क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई और सहयोग मजबूत करने के रास्तों पर विचार किया गया।
भारत और ईयू ने इस बात पर सहमति जताई कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थानों को मजबूत करना बेहद जरूरी है। दोनों पक्षों ने सिविल सोसायटी संगठनों, पत्रकारों, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और संगठन बनाने की स्वतंत्रता की रक्षा के महत्व पर भी जोर दिया।
बैठक में ईयू ने हर परिस्थिति में मृत्युदंड (फांसी की सजा) का विरोध दोहराया, जबकि भारत ने विकास के अधिकार (Right to Development) को एक अलग, सार्वभौमिक, मूलभूत और अविच्छेद्य मानवाधिकार के रूप में अपनी स्थिति दोहराई।
दोनों पक्षों ने यह भी कहा कि वे द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मंचों, जैसे संयुक्त राष्ट्र महासभा और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में मानवाधिकारों पर सहयोग और संवाद जारी रखेंगे।
बैठक के अंत में भारत और यूरोपीय संघ ने 2027 में होने वाले अगले मानवाधिकार संवाद में इसी रचनात्मक सहयोग को आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई।