भारतीय संगीत जगत में कई ऐसी आवाजें हैं, जिन्होंने अपनी गायकी से करोड़ों लोगों के दिलों में खास जगह बनाई है। हिंदी सिनेमा के संगीत इतिहास में लता मंगेशकर, आशा भोसले, गीता दत्त, सुमन कल्याणपुरी, अल्का याग्निक और अनुराधा पौडवाल जैसी महान गायिकाओं का नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाता है। इसी सूची में एक ऐसा नाम भी शामिल है, जिन्होंने हिंदी फिल्मों में अपनी पहचान बनाने से पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा लिया था। यह नाम है प्रसिद्ध गायिका केएस चित्रा का।
केएस चित्रा ने भारतीय संगीत जगत में अपनी मधुर आवाज और अलग अंदाज से खास मुकाम हासिल किया है। खास बात यह है कि हिंदी फिल्मों में बड़ा नाम बनने से पहले ही वह अपनी गायकी के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल कर चुकी थीं। बाद में उनके नाम राष्ट्रीय पुरस्कारों की संख्या बढ़कर छह हो गई, जो उनकी असाधारण प्रतिभा और संगीत के प्रति समर्पण को दर्शाता है। केएस चित्रा ने अपने करियर की शुरुआत दक्षिण भारतीय फिल्मों से की थी। उनकी आवाज में मिठास और भावनाओं की गहराई ने उन्हें बहुत जल्द पहचान दिलाई। मलयालम, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ फिल्मों में उन्होंने कई यादगार गीत गाए। दक्षिण भारतीय संगीत जगत में उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि उन्हें ‘मेलोडी क्वीन’ के नाम से भी जाना जाने लगा।
हिंदी फिल्मों में केएस चित्रा का सफर साल 1985 में शुरू हुआ। हालांकि शुरुआत में उन्हें बॉलीवुड में बड़ी सफलता नहीं मिल पाई और उनकी आवाज को देशभर में पहचान मिलने में समय लगा। लेकिन उनकी प्रतिभा को एक ऐसे गीत ने नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, जिसने हिंदी दर्शकों को भी उनका प्रशंसक बना दिया। फिल्म ‘लव’ में गाए गए उनके गीत ने केएस चित्रा को हिंदी सिनेमा में खास पहचान दिलाई। इस गाने की लोकप्रियता ने साबित कर दिया कि उनकी आवाज सिर्फ दक्षिण भारतीय भाषाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंदी संगीत प्रेमियों के बीच भी उतनी ही पसंद की जा सकती है।