ग्राम विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरपंचों को दिया जा रहा व्यवहारिक प्रशिक्षण

Posted on: 2026-08-06


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रायगढ़, 06 अगस्त । ग्रामीण विकास को नई दिशा देने और वीबी-जीराम जी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला पंचायत रायगढ़ द्वारा नवनिर्वाचित सरपंचों के लिए विशेष क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। 3 से 10 अगस्त तक चलने वाले इस चरणबद्ध प्रशिक्षण में जिले की विभिन्न जनपद पंचायतों के लगभग 550 नवनिर्वाचित सरपंच भाग ले रहे हैं।

सचिव प्रशिक्षण संस्थान, टी.वी. टॉवर रोड, रायगढ़ में प्रतिदिन प्रातः 11 बजे आयोजित हो रहे इस प्रशिक्षण का उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों को आधुनिक, वैज्ञानिक एवं परिणामोन्मुख ग्राम विकास की अवधारणा से जोड़ना है, ताकि वे अपने ग्रामों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रभावी विकास योजनाएं तैयार कर सकें।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को विकसित भारत वीबी-जीराम जी योजना के उद्देश्य, प्रावधान, अनुमेय कार्यों तथा ग्राम पंचायतों में रोजगार सृजन, आजीविका संवर्धन और टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण की पूरी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी नीला राम पटेल के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण सत्रों का संचालन सहायक परियोजना अधिकारी ऋषि गणेशन नायक, तकनीकी समन्वयक आशुतोष श्रीवास्तव तथा जिला प्रोग्रामर अभिषेक दांडेकर द्वारा किया जा रहा है। विशेषज्ञों द्वारा सरपंचों को व्यवहारिक उदाहरणों एवं तकनीकी प्रस्तुतीकरण के माध्यम से योजना के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया जा रहा है।

प्रशिक्षण में ग्राम पंचायत विकास योजना के वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित निर्माण, जीआईएस आधारित योजना निर्माण, संसाधन मानचित्रण, पीएम गतिशक्ति प्लेटफॉर्म, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा विभिन्न विभागों के अभिसरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही सरपंचों को यह भी बताया जा रहा है कि किस प्रकार उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर ग्राम पंचायतों में टिकाऊ एवं जनहितकारी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जा सकता है। प्रशिक्षण में विकसित भारत जी-राम योजना के चार प्रमुख स्तंभ-जल सुरक्षा, ग्रामीण अधोसंरचना, ग्रामीण आजीविका तथा आपदा न्यूनीकरण पर विशेष रूप से चर्चा की जा रही है। इसके साथ ही योजना के छह प्रमुख फोकस क्षेत्रों-जल संरक्षण, सिंचाई, भू-जल पुनर्भरण, जल स्रोतों का पुनर्जीवन, वाटरशेड विकास तथा वनीकरण के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं ग्राम पंचायतों में स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण की रणनीतियों से भी सरपंचों को अवगत कराया जा रहा है।