भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता देश के परिवहन क्षेत्र में एक बड़े बदलाव का संकेत दे रही है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अब केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं रह गई है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास, रोजगार, तकनीकी आत्मनिर्भरता और घरेलू विनिर्माण क्षमता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण आधार बन रही है। सरकारी नीतियों, उपभोक्ताओं के बढ़ते विश्वास, तकनीकी प्रगति और चार्जिंग ढांचे के विस्तार ने भारत में इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र को तेजी से आगे बढ़ाया है।
नीतिगत पहल से मिली रफ्तार
भारत की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी यात्रा को वर्ष 2015 में राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान और फेम इंडिया योजना की शुरुआत से गति मिली। इन पहलों का उद्देश्य पेट्रोलियम ईंधन के आयात पर निर्भरता कम करना, शहरी वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना और परिवहन क्षेत्र से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को घटाना था। परिवहन क्षेत्र भारत के कुल उत्सर्जन में करीब 9% योगदान देता है। फेम योजना के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद को प्रोत्साहन देने के साथ चार्जिंग बुनियादी ढांचे और घरेलू विनिर्माण को भी बढ़ावा दिया गया।
एक दशक में 46 गुना बढ़ी बिक्री
इन नीतिगत प्रयासों का असर इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। वित्त वर्ष 2015-16 में कुल वाहन बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी महज 0.08% थी, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 8.26% हो गई। वर्ष 2016 में भारत में करीब 50 हजार इलेक्ट्रिक वाहन बिके थे, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 23 लाख हो गई। यानी एक दशक में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री करीब 46 गुना बढ़ी है। इसी अवधि में वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री में करीब 20 गुना वृद्धि दर्ज की गई।
दोपहिया और तिपहिया बने बदलाव के अगुआ
भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का सबसे तेज विस्तार दोपहिया और तिपहिया वाहनों के क्षेत्र में देखने को मिला है। वर्ष 2025 में करीब 12.8 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया और 8 लाख इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहन बेचे गए। उत्तर प्रदेश 4 लाख से अधिक वाहनों की बिक्री के साथ देश का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक वाहन बाजार बना और राष्ट्रीय बिक्री में उसकी हिस्सेदारी 18% रही। महाराष्ट्र 2.66 लाख वाहनों के साथ 12% और कर्नाटक करीब 2 लाख वाहनों के साथ 9% हिस्सेदारी के साथ प्रमुख बाजार रहे। पिछले दशक में इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकरण में 62% से अधिक की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है।
निर्यात के मोर्चे पर भी बढ़ रही मौजूदगी
भारत अब केवल घरेलू बाजार के लिए इलेक्ट्रिक वाहन तैयार करने तक सीमित नहीं है। इलेक्ट्रिक वाहन निर्यात 2020 में 12 लाख डॉलर से बढ़कर 2024 में 8.4 करोड़ डॉलर हो गया। नेपाल, इंडोनेशिया और जापान प्रमुख निर्यात बाजारों में शामिल हैं। निर्यात में यह वृद्धि संकेत देती है कि भारत वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है और भविष्य में एक प्रमुख विनिर्माण एवं निर्यात केंद्र बनने की क्षमता रखता है।
चार्जिंग नेटवर्क का लगातार विस्तार
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विस्तार में चार्जिंग बुनियादी ढांचा सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक है। जुलाई 2026 तक देश में 52,718 सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध थे। इनमें 16,561 स्टेशन फास्ट चार्जिंग की सुविधा से लैस थे। चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार से इलेक्ट्रिक वाहनों की व्यावहारिक उपयोगिता बढ़ रही है और उपभोक्ताओं के बीच लंबी दूरी की यात्रा तथा चार्जिंग को लेकर भरोसा मजबूत हो रहा है।
पीएम ई-ड्राइव से विनिर्माण को समर्थन
सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण और इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। ₹10,900 करोड़ के परिव्यय वाली पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत 28 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों को समर्थन देने का लक्ष्य रखा गया है। जनवरी 2026 तक इस योजना के तहत 22.12 लाख वाहन बिक चुके थे। योजना में 14,028 इलेक्ट्रिक बसों के लिए ₹4,391 करोड़ और सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों के लिए ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा पीएम ई-बस सेवा-पीएसएम योजना के तहत सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के जरिए 10,000 इलेक्ट्रिक बसें तैनात की जानी हैं।
घरेलू बैटरी निर्माण पर जोर
इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में बैटरी तकनीक और उत्पादन क्षमता को रणनीतिक महत्व दिया जा रहा है। एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल बैटरी के लिए पीएलआई योजना का परिव्यय ₹18,100 करोड़ है। इसके तहत देश में 50 गीगावाट-घंटे की संचयी उत्पादन क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य है। इलेक्ट्रिक वाहन की कुल लागत में बैटरी की हिस्सेदारी करीब 35 से 40% तक होती है। ऐसे में घरेलू बैटरी निर्माण से उत्पादन लागत कम करने, आयात पर निर्भरता घटाने, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में मदद मिल सकती है।
निवेश और स्टार्टअप इकोसिस्टम में तेजी
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी क्षेत्र में निवेश भी तेजी से बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2025 में भारत के इलेक्ट्रिक वाहन इकोसिस्टम ने 1.4 अरब डॉलर से अधिक का निवेश आकर्षित किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 27% अधिक था। इनमें से करीब 1.2 अरब डॉलर इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं को मिले। देश में करीब 400 इलेक्ट्रिक वाहन स्टार्टअप भी सक्रिय हैं, जो बैटरी तकनीक, चार्जिंग समाधान, वाहन निर्माण और कम लागत वाली तकनीक के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।
2034 तक 191 अरब डॉलर का हो सकता है बाजार
भारत के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार का भविष्य भी बेहद संभावनाशील माना जा रहा है। वर्ष 2025 में 3.71 अरब डॉलर का इलेक्ट्रिक वाहन बाजार 2034 तक बढ़कर 191.04 अरब डॉलर होने का अनुमान है। इसी अवधि में इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी बाजार 2.71 अरब डॉलर से बढ़कर 15.90 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। भारत ने 2030 तक कुल वाहन बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 30% करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही देश में चार्जिंग बुनियादी ढांचे के बड़े विस्तार की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
हरित परिवहन से आत्मनिर्भर भारत तक
भारत की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी यात्रा केवल पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों को बिजली से चलने वाले वाहनों में बदलने की कहानी नहीं है। यह स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भर विनिर्माण, रोजगार सृजन और तकनीकी नवाचार से जुड़ी व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा है। मजबूत नीतिगत समर्थन, बढ़ते निवेश, घरेलू बैटरी निर्माण, विस्तृत चार्जिंग नेटवर्क और तकनीकी नवाचार के साथ भारत इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।