जब भी विटामिन डी की कमी की बात की जाती है,तो सबसे पहले हमारा ध्यान हड्डियों की कमजोरी की ओर जाता है. लेकिन एक नई रिसर्च के मुताबिक विटामिन डी की कमी होने से न सिर्फ हड्डियों पर असर पड़ता है, बल्कि ये हार्ट हेल्थ को भी प्रभावित कर सकती है.
ICMR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रीशन (ICMR-NIN) हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने अपनी हालिया स्टडी में पाया है कि विटामिन D की कमी हार्ट की सेल्स को नुकसान पहुंचाने वाले बदलावों को बढ़ावा दे सकती हैं.
रिसर्चर्स के मुताबिक, शरीर में विटामिन D का लेवल कम होने पर हार्ट की सेल्स में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ सकता है. ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस एक ऐसी स्थिति होती है,
जो शरीर में हानिकारक फ्री रेडिकल्स और उन्हें निष्क्रिय करने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स के बीच संतुलन बिगड़ जाता है. लंबे समय तक यए स्थिति बनी रहे, तो सेल्स को नुकसान पहुंच सकता है.
स्टडी में ये भी पाय गया है कि विटामिन D की कमी से शरीर की नैचुरल एंटीऑक्सीडेंट सुरक्षा प्रणाली कमजोर पड़ सकती है. इसका मतलब है कि हार्ट की सेल्स स्ट्रेस और डैमेज से से खुद को बचाने में कम सक्षम हो सकती हैं.
ICMR-NIN के वैज्ञानिकों ने अपने स्टडी में पाया कि जिन चूहों को विटामिन D की कम मात्रा मिली, उनके हार्ट में ऑक्सीडेटिव डैमेज अधिक देखा गया. इसके अलावा शरीर को नुकसान से बचाने वाले महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट एंजाइमों की एक्टिविटी भी कम पाई गई.
इस स्टडी के दौरान वैज्ञानिकों ने ग्लूटाथियोन के स्तर में भी कमी दर्ज की. ग्लूटाथियोन शरीर का एक महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट है, जो सेल्स को ऑक्सीडेटिव नुकसान से बचाने में मदद करता है. इसका लो लेवल हार्ट हेल्थ के लिए चिंता का विषय हो सकता है.
स्टडी में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई. शोधकर्ताओं ने पाया कि विटामिन D की कमी Nrf2 Pathway को प्रभावित कर सकती है. ये एक ऐसा बायोलॉजिकल सिस्टम है, जो शरीर की एंटीऑक्सीडेंट सुरक्षा को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
जब ये सिस्टम ठीक तरह से काम नहीं करता, तो सेल्स की खुद को सुरक्षित रखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. इससे हार्ट संबंधी परेशानियों के रिस्क बढ़ने की संभावना होती है.
विटामिन D सिर्फ कैल्शियम के अवशोषण और हड्डियों की मजबूती के लिए ही जरूरी नहीं है, बल्कि ये प्रतिरक्षा प्रणाली, मांसपेशियों और हार्ट के सामान्य कामकाज में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
एक्सर्ट का मानना है कि विटामिन D की कमी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. नियमित धूप, संतुलित आहार और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से जांच करवाना इस कमी को समय रहते पहचानने में मदद कर सकता है.