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जगदलपुर, 12 मई । स्कूल शिक्षा विभाग में सेवा निवृत्ति के ठीक पहले मिला प्राचार्य पद का प्रमोशन अब कई व्याख्याताओं के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। हालात ऐसे हैं कि सेवानिवृत्ति के कई महीने बीत जाने के बाद भी दर्जनों रिटायर्ड प्राचार्यों को न तो पेंशन मिल पाई है और न ही पीपीओ जारी हो सका है। इससे नाराज भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ ने अब नया रायपुर स्थित संचालक लोक शिक्षण कार्यालय और शिक्षा सचिव कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है।पेंशनर्समहासंघ के बस्तर संभाग अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय मंत्री रामनारायण ताटी ने आज मंगलवार काे बताया कि शासन की लापरवाही के कारण रिटायर्ड प्राचार्य दर-दर भटकने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि नियमानुसार किसी भी कर्मचारी को सेवा निवृत्ति के दिन ही पेंशन भुगतान आदेश और समस्त स्वत्वों का लाभमिल जाना चाहिए, लेकिन शिक्षा विभाग में खुद शासन के आदेशों का पालन नहीं हो पा रहा है। सबसे बड़ी समस्या न मांग, न जांच, न घटना प्रमाण पत्र जारी नहीं होने की बताई जा रही है। इसी दस्तावेज के अभाव में संयुक्त संचालक कोष लेखा कार्यालय से पीपीओ जारी नहीं हो पा रहा।
पेंशनर्स महासंघ ने मांग की कि यदि 15 दिनों के भीतर लंबित प्रकरणों का निराकरण नहीं हुआ तो नया रायपुर स्थित संचालक लोक शिक्षण कार्यालय और शिक्षा सचिव कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। मांग करने वालों में आर एन ताटी, किशोर जाधव, अब्दुल सत्तार खान, शिव कुमार मिश्रा, रमापति दुबे, एल.एस. नाग, पी एस. ठाकुर, बी एस नेताम, अनिता राज, करमजीत कौर, कविता बिजौलिया, प्रभाकर शर्मा समेत कई पेंशनर्स शामिल हैं।
पेंशनर्स महासंघ ने बीजापुर जिले के प्रभाकर राज शर्मा का उदाहरण देते हुए बताया कि वे स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम स्कूल में व्याख्याता एवं प्रभारी प्राचार्य थे। 29 अगस्त 2025 को उन्हें प्राचार्य पद पर पदोन्नति मिली, 30 अगस्त को पदभार संभाला और 30 सितंबर 2025 को सेवानिवृत्त हो गए। इसी तरह कविता बिजौलिया को भी अगस्त 2025 में प्राचार्य पद पर पदोन्नति मिली थी और नवंबर 2025 में वे सेवानिवृत्त हो गईं। दोनों मामलों में शासन स्तर पर फाइलें लंबित हैं। महासंघ का आरोप है कि जो लोग रायपुर जाकर व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर रहे हैं, उनके प्रकरण तेजी से निपटाए जा रहे हैं, जबकि दूरस्थ जिलों के पेंशनर्स परेशान हो रहे हैं। संघ ने संचालक लोक शिक्षण कार्यालय की एक कर्मचारी पर प्रतिनिधियों से अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग