पितृ पक्ष केवल अनुष्ठान नहीं कृतज्ञता का पर्व : संत राजीवलोचनदास

Posted on: 2026-10-11


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रायपुर  कान्यकुब्ज सभा एवं शिक्षा मंडल के तत्त्वावधान में पितृ मोक्ष अमावस्या के पवित्र अवसर पर एक भावपूर्ण एवं भव्य सामूहिक श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वजनों एवं समाजसेवियों ने उपस्थिति दर्ज कराकर इस लोक से गमन कर चुकीं दिव्य आत्माओं के प्रति अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।

समारोह के मुख्य वक्ता संत राजीवलोचनदास महाराज रहे। अपने ओजस्वी एवं सारगर्भित संबोधन में उन्होंने सनातन संस्कृति में पितृ पक्ष के महात्म्य, उसकी शास्त्रीय प्रक्रिया एवं सामाजिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

संत राजीवलोचनदास ने कहा कि पितृ पक्ष हमारी सनातन परंपरा का वह स्वर्णिम स्तंभ है जो हमें अपने पूर्वजों और उनकी महान परंपराओं से जोड़ता है। उन्होंने कहा, "पितरों का स्मरण करना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि उन पूर्वजों के प्रति हमारी अनन्य कृतज्ञता और निष्ठा का प्रकटीकरण है, जिनके संस्कारों और परिश्रम की बदौलत आज हम स्थापित हैं।"

महाराज जी ने पितृ मोक्ष अमावस्या पर किए जाने वाले तर्पण, दान एवं पिंडदान की शास्त्रीय विधि और उसके गूढ़ आध्यात्मिक अर्थ को बहुत ही सरल एवं सुगम शैली में समझाया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह का आह्वान किया कि अपने दिवंगत पूर्वजों की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए उनके बताए उच्च आदर्शों, समाज सेवा और नैतिक मूल्यों का निष्ठापूर्वक पालन करें।

कार्यक्रम के आरंभ में अध्यक्ष सुरेश मिश्रा, उपाध्यक्ष संजय अवस्थी एवं सचिव राजकुमार दीक्षित ने आयोजन के उद्देश्य और समाज के लिए किए जा रहे सेवा कार्यों की विस्तृत जानकारी दी इस दौरान प्रभारी गिरजा शंकर दीक्षित, प्रमोद कुमार मिश्रा, जयशंकर तिवारी एवं श्रीकांत अवस्थी और संस्था के पदाधिकारियों सदस्यों ने मुख्य अतिथि राजीव लोचन दास का शाल श्रीफल से अभिनंदन किया तत्पश्चात सह सचिव अनुराग पांडे एवं पूर्व पदाधिकारियों के द्वारा दिवंगत पूर्व अध्यक्षों की तस्वीर पर माल्यार्पण किया गया। इस प्रकार के आयोजन को प्रतिवर्ष निरंतर आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि परिवारजनों एवं समाज के सहयोग से दिवंगत आत्माओं के प्रति सच्ची श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने की यह परंपरा आगे भी जारी रखी जाएगी।