भारतीय रेलवे ने ट्रैक्शन और डिजिटल संचार प्रणाली के उन्नयन के लिए 765 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को दी मंजूरी

Posted on: 2026-03-11


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भारतीय रेलवे ने देश के प्रमुख रेल मार्गों पर परिचालन क्षमता बढ़ाने और संचार प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए 765 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं के तहत इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को उन्नत किया जाएगा और रेलवे के डिजिटल संचार नेटवर्क को भी मजबूत किया जाएगा।

सबसे पहले, ईस्ट कोस्ट रेलवे के अंतर्गत आने वाले दुव्वाडा–विशाखापत्तनम–विजयनगरम सेक्शन में इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम के उन्नयन के लिए 318.07 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। 106 किलोमीटर लंबे इस सेक्शन में मौजूदा 1×25 केवी सिस्टम को उन्नत कर 2×25 केवी सिस्टम में बदला जाएगा। इससे इस व्यस्त कॉरिडोर पर माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी, ट्रेनों की गति में सुधार होगा और संचालन अधिक विश्वसनीय बनेगा। यह मार्ग हावड़ा–चेन्नई रेल रूट का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो ओडिशा और छत्तीसगढ़ से खनिज तथा औद्योगिक वस्तुओं को विशाखापत्तनम बंदरगाह तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है।

इसी तरह, दक्षिण मध्य रेलवे के गुंटकल डिविजन के अंतर्गत आने वाले रायचूर–गुंटकल सेक्शन में भी इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को उन्नत करने के लिए 259.39 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। 126 किलोमीटर लंबे इस सेक्शन में भी मौजूदा 1×25 केवी सिस्टम को उन्नत कर 2×25 केवी सिस्टम में बदला जाएगा। यह सेक्शन मुंबई–चेन्नई रेल मार्ग पर स्थित है और यहां अपग्रेड होने से मालगाड़ियों के संचालन में सुधार होगा तथा यात्री ट्रेनों की गति और विश्वसनीयता बढ़ेगी। इसके अलावा, यह अपग्रेड वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों के संचालन को भी बेहतर बनाएगा। यह परियोजना रेलवे के उस राष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ट्रैक्शन सिस्टम को आधुनिक बनाकर माल ढुलाई क्षमता को 3000 मिलियन टन तक पहुंचाना है।

इसके अलावा, पश्चिम रेलवे के वडोदरा और मुंबई सेंट्रल डिविजन में संचार नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 187.88 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इस परियोजना के तहत 4×48 कोर ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) नेटवर्क स्थापित किया जाएगा, जिससे रेलवे के डिजिटल संचार तंत्र की क्षमता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। इसके तहत कुल 1000 किलोमीटर रूट पर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जाएगी, जिसमें वडोदरा डिविजन में 692 किलोमीटर और मुंबई डिविजन में 308 किलोमीटर शामिल हैं। यह नेटवर्क कवच प्रणाली और अन्य महत्वपूर्ण रेलवे संचार सेवाओं को मजबूत समर्थन प्रदान करेगा। कवच भारतीय रेलवे की स्वदेशी तकनीक है, जिसका उद्देश्य ट्रेनों की टक्कर को रोकना और सुरक्षा को बढ़ाना है।

रेलवे के अनुसार इन परियोजनाओं के पूरा होने से प्रमुख रेल मार्गों पर ट्रैक्शन पावर सिस्टम मजबूत होगा, संचार नेटवर्क अधिक विश्वसनीय बनेगा और माल तथा यात्री ट्रेनों का संचालन अधिक सुचारु और कुशल हो सकेगा। इसके साथ ही आधुनिक ट्रेनों के संचालन को भी बेहतर समर्थन मिलेगा और भारतीय रेलवे की समग्र कार्यक्षमता में सुधार होगा।