रिसर्चर
ने अपनी स्टडी में कोरोनरी आर्टरी कैल्शियम स्कैन पर फोकस किया. इन स्कैन के जरिए
दिल की नसों में जमे कैल्शियम का पता लगाया जाता है. कैल्शियम जमने का मतलब है कि
दिल की बीमारियां शुरू हो गई है. ब्लड प्रेशर, कॉलेस्ट्रॉल
और दूसरे फैक्टर के साथ मिलाकर डॉक्टर इससे मरीज का खतरे का पता लगाते हैं. मायो
क्लीनिक की स्टडी में रिसर्चर ने इन्हीं स्कैन को एआई की मदद से नए तरीके से
एनालाइज किया. रिसर्चर ने एआई से यह पता लगाया कि हार्ट के चारों ओर कितना फैट जमा
हुआ है. फैट के कारण सूजन और दिल से जुड़ी दूसरी बीमारियां हो सकती है. एआई के
बिना इसका पता लगाना काफी मुश्किल था.
ऐसे चलेगा बीमारी का
पता
रिसर्च
में पता चला कि जिन लोगों के दिल के चारों और ज्यादा फैट जमा हुआ है, उन्हें दिल से जुड़ी बीमारियां होने की ज्यादा आशंका है. इसका सबसे बड़ा
फायदा यह है कि इसके लिए मरीज को अलग से टेस्ट करवाने की जरूरत नहीं पड़ती. रूटीन
केयर के दौरान होने वाले स्कैन से इसका पता लगाया जा सकता है. अब डॉक्टर भी जनरल
रिस्क फैक्टर पर भरोसा करने की बजाय इलाज के लिए डिटेल्ड इंफोर्मेशन पा सकते हैं,
जिससे मरीज को फायदा होगा.
अभी इन लिमिटेशन पर
काम करने की जरूरत
अभी
यह रिसर्च शुरुआती चरण में है और इस पर काफी काम किए जाने की जरूरत है. अभी यह
समझना भी बाकी है कि डॉक्टर रियल-टाइम में इस इंफोर्मेशन को कैसे यूज कर पाएंगे.
साथ ही स्टडी में ज्यादा लोगों पर इसका ट्रायल होना बाकी है. फिर भी यह स्टडी
बताती है कि एआई से हेल्थकेयर सेक्टर में बड़ा बदलाव आ सकता है. इससे डॉक्टरों को
भी इलाज में मदद मिलेगी. टेक्नोलॉजी की मदद से वो हिडन पैटर्न देख सकेंगे, जिससे उनकी डिसीजन मेकिंग बेहतर होगी. दूसरी तरफ इससे बीमारियों से लोगों
को बचाने में भी सहायता मिलेगी.